तू आपे खैरा पा दे जोगियां

पारंपरिक
अन्य भजन बाबा बालक नाथ भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मैनु मंगने दा वल नहीं आउंदा,

तू आपे खैरा पा दे जोगियां

चंगे माड़े योगी सब तू ही ने तारे,

मैं भी आके खड़ी हां तेरा ही द्वारे,

तनु तारण हारा कहन्दे,

जगा दे मेरे लेख जोगियां,

तू आपे खैरा पा दे जोगियां

देखि देखि जोगी मेरा मान ना तोड़ी,

मंगति मैं तेरी मैनु खाली न मोड़ी,

सुनी अर्ज तू आज मेरी,

दुखड़े मिटा दे जोगियां,

तू आपे खैरा पा दे जोगियां,

आई आई जोगी तेरे दर आई,

गमा दी मैं मारी बड़े दुखा दी सताई,

तेरे चर्चे चार चुफेरे तू बेड़ी बने ला दे जोगियां,

तू आपे खैरा पा दे जोगियां

रोइ रोइ तेरे दर ते मैं रोइ,

तेरे बाजो दाता मेरा दर्दी न कोई,

मेरे घर विच रेहमता बरसा दे,

तू आपे खैरा पा दे जोगियां

तेरे तेरे जोगी रंग निराले,

मेरे दुःख टाल जीवे रमन दे टाले,

तेरे हाथ विच किस्मत मेरी तू हुकम सुनादे जोगियाँ

तू आपे खैरा पा दे जोगियां

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।