अनेकता में एकता विशेषता हमारी है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन देश भक्ति भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अनेकता में एकता विशेषता हमारी है,

जन्म भूमि राम की ध्रुव की तपस थली,

शक्ति के प्रतीक में साहसी महाबली,

नर नारायणो की ये धरती प्यारी है ,

अनेकता में एकता..........

कुंड कला देव भी कृष्ण भी यही हुये,

त्याग श्री भीविशियो हरीश चन यही हुये,

कर्म कर्म पर त्याग की गाथा ही न्यारी है,

अनेकता में एकता.........

दुनिया में व्याक्त है संस्कृति की अजेयता,

मात्र भूमि धन्य है आश ज्ञान श्रेष्ठा,

भोग वादी संस्कृति सत्य शिव से हारी हैं,

भेश भूशा भीं है भीं खान पान है,

अनेकता में एकता.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।