आवो भोग लगावो बाबा जी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

आवो भोग लगावो बाबा जी आवो भोग लगावो,

रोटा नु भोग लगावो बाबा जी रोटा न भोग लगावो,

भोग गरीब दा लावो बाबा जी,

आवो भोग लगावो बाबा जी

श्रद्धा दे नाल रोट बनाया हलवा रोट मैं लेके आया,

धुनें ते हज़ारी लावो बाबा जी,

आवो भोग लगावो बाबा जी

रुखा सूखा भोजन मेरा,

सब संगता राह तक दियां तेरा,

खुश हो भोजन खावो बाबा जी,

आवो भोग लगावो बाबा जी

ला ले भोग गरीब दा सैयां,

किसा बदल नसीब दा सैयां,

चौंकी ते फेरा पावो बाबा जी,

आवो भोग लगावो बाबा जी

माँ रतनो दे भाली आजा,

भर दे झोलियाँ खाली आजा,

बिगड़े लेख बनावो बाबा जी,

आवो भोग लगावो बाबा जी

प्रीत बलिहार करे अरदासा,

पूरियां कर दो राणे दियां आसा,

भगता दी आस बचाओ बाबा जी,

आवो भोग लगावो बाबा जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।