हंसा ये पिंजरा नहीं तेरा

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॥ पावन पाठ ॥

हंसा ये पिंजरा नहीं तेरा,

कंकर चुन चुन महल बनाया,

लोग कहे घर मेरा,

ना घर तेरा ना घर मेरा,

चीड़ी आ रेन बसेरा,

हंसा ये पिंजरा नहीं तेरा,

बाबा दादा भाई भतीजा,

चले न संग कोई तेरा,

हठी घोडा माल खजाना पड़ा रहे धन तेरा,

हंसा ये पिंजरा नहीं तेरा,

मात पिता स्वार्थ के लोभी,

करते मेरा मेरा,

कहता कबीर सुनो भाई सादो,

इक दिन जंगल नेरा,

हंसा ये पिंजरा नहीं तेरा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।