बरस रहा छम छम सावन होरी का

स्वामी भुवनेश्वरी देवी जी महाराज
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रंग घोले कोई भंग घोले कोई मस्ती में रहा झूम,

बरस रहा छम छम सावन होरी का

बजे ढोल मृदंग मजीरा, बजे बांस की पूरी

छनके पायल, छनके नुपुर, नाचे छोरा छोरी

रंग घोले कोई भंग घोले...

किसी के हाथ में केसर होरी, किसी के हाथ पिचकारी

किसी के पकडे रंग की बदर्यीया, किसी ने पुष्प की दारी

रंग घोले कोई भंग घोले...

हरो को झूमे नाचे गाये, बरस रही रास की धरा

रंगो के सावन में बेरंग रह गया मधुक बेचारा

रंग घोले कोई भंग घोले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।