सँवारे दर ना तेरा छोड़े गे हम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जब तलक जान है जा दम में है दम,

सँवारे दर ना तेरा छोड़े गे हम,

करो गे न जब तक कर्म सँवारे न दर तेरा छोड़े गे हम सँवारे,

ये खाई है हम ने कसम सँवारे,

हे खाटू वाले श्याम तुझे कान्हा की कसम है,

हे नीले के सवार तुझे करना कर्म है,

सँवारे दर ना तेरा छोड़े गे हम,

जो तुम चाहो गे हम सवर जायेगे,

कठिन रास्तो से गुजर जायेगे,

और भव सागर से पार उत्तर जायगे,

हम तेरे आज्ञाकार है हम तेरे सेवा दार,

ये तन मन अपना करते तुम पे निशार है,

सँवारे दर ना तेरा छोड़े गे हम,

मुख से पर्दा जो हटा जलवा हम सब को दिखा,

भक्त प्यासे है खड़े क्या जितने लोगो की दुआ,

नजर पर्दा हुआ पर्दा गया पर्दा खुदा पर्दा,

बहुत खूब पर्दा है ये श्याम तेरा पर्दा,

नहीं देखा हमने दुनिया में तुम्हरे पर्दा का पर्दा,

कभी तुम पर्दे के अंदर कभी तुम पर्दे के बाहर,

समज तक अब तक आया नहीं जलवा है या पर्दा,

हमेशा हर घडी रहता है चेहरे पे रहता है बड़ा पर्दा,

तेरा देदार हो कैसे के दुश्मन बना है पर्दा,

उठा कर मुख से पर्दा श्याम आओ पर्दे से बाहर,

ये सारे भक्त है तेरे भला भक्तो से क्या पर्दा,

मुख से पर्दा तो हटा जलवा हम सब को हटा,

भक्त प्यासे है खड़े प्यास उनकी भुजा,

सुन लो खाटू के रत्न अगर करोगे न कर्म,

नाम लेके तेरा जान लुटा देंगे हम,

हम सेवक है तेरे साथ है,

जभी तुम से करते ये अरदास है,

हम तेरे लिए दुनिया से रिश्ता नाता तोड़ने पर,

पर जिद भी श्याम तेरा दर नाहियो छोड़े गे,

सँवारे दर ना तेरा छोड़े गे हम,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।