सांवरे दर ना तेरा छोड़ेगे हम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कब आओगे कब आओगे कब आओगे.

आबरू जब लूट जायेगी क्या तब आओगे,

देर न हो जाये कही देर न हो जाये,

कब आओगे कब आओगे कब आओगे.

आजा रे आजा रे द्रोपती भेहना भुलाये,

देर न हो जाये कही देर न हो जाये,

कहा है कृष्ण कन्हियाँ यही सब पूछते है,

अक्ल के तेरे ना आने का सब पूछते है,

आ भी जाओ सोहने श्याम आ भी जाओ,

देर न हो जाये कही देर न हो जाये,

अरदास करेदो भेहना मेरी लाज बचा लो एह कान्हा,

इक तेरे सिवाए गिरधारी यहाँ कोई नहीं मेरा,

देर न हो जाये कही देर न हो जाये,

पापी दुशाण मेरे पीछे पड़ा है,

चीर हरण के लिये जिद पे अड़ा है,

अबला नारी हु मैं जुए की हारी,

पीड़ पड़ी ये कान्हा अब मुझपे बाहरी,

तुम जो आये ना कान्हा वो मेरी किस्मत,

सो जायेगी जो बात होनी वो भी हो जायगी,

देर न हो जाये कही देर न हो जाये,

दिल मेरा बेकरार है कान्हा,

जानू तुम पर निसार है कान्हा,

तुम आदभी को जरू आओ गे,

मुझको ये एह विस्वाश है कान्हा

गम की घडी है आजा,

मुश्किल बड़ी है आजा,

किस्मत बुरी है आजा,

जा पर बनी है आजा,

देर न हो जाये कही देर न हो जाये,

आजा कन्हियाँ तेरा रास्ता उडीक दी आ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।