आया महा कुंभ मेला

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आया महा कुंभ मेला आया महा कुंभ मेला,

साधू और सनयाईयो का यहाँ लगता रेला,

आया महा कुंभ मेला आया महा कुंभ मेला,

माँ गंगा की पवन धारा में सब डुबकी लगाते है,

नर नारी हो या नारायण महा कुंभ सब आते है,

गंगा यमुना सरस्वती का होता या खेला,

आया महा कुंभ मेला आया महा कुंभ मेला,

रथ सजा कर संत लोग यहाँ माँ से मिलने आते है,

अड़भंगी साधु यहाँ पे बैठके धुनि रमाते है,

नागा बाबा सा मैंने देखा न कोई अलबेला,

आया महा कुंभ मेला आया महा कुंभ मेला,

सोने से नगरी ये सजी यहाँ तीनो लोक गुण गान करे,

धूल जाते है पाप सभी जो सनगम में आशनां करे,

गगनदीप गुण गाता जो है महादेव का चेला,

आया महा कुंभ मेला आया महा कुंभ मेला,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।