मैं ते जोगी दे मंदिरा नु जाना

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॥ पावन पाठ ॥

मैं ते जोगी दे मंदिरा नु जाना जोगी ने मैनु आप सदया,

जाके गुफा ते दीदार ओहदा पाना जोगी ने मैनु आप सदया,

मैं ते बाबे दे मंदिरा नु जाना बाबे ने मैनु आप सदया,

जे तू जाना मैनु ले चल नाल दीदार मैं भी पाना दाते दा,

दर झुल्दे ने झंडे जीहदे लाल दीदार मैं भी पाना दाते दा,

कुण्डलु कुण्डलु बाल जोगी सिर सोहन्दे ने,

नैन मस्ताने दिल भगता दा मोहनदे ने,

जिहड़ा धोलगिरी ते ठिकाना जोगी ने मैनु सदया,

मैं ते जोगी दे मंदिरा नु जाना जोगी ने मैनु आप सदया,

ज्ञातृ आउंदे जीहदे दर दुरो दुरो चल के,

सजदा सुने जोगी सरिया नु कलह के,

ओ ता माई रत्नो दा सोहना लाल दीदार मैं भी पाना नाथ दा,

जे तू जाना मैनु ले चल नाल दीदार मैं भी पाना दाते दा,

रोट परशाद लेके गुफा ते चढ़ना है,

रज रज जोगी दा दीदार आज मैं भी करना है,

तूने वेडा बने लाना जोगी ने मैनु आप सदया,

मैं ते जोगी दे मंदिरा नु जाना जोगी ने मैनु आप सदया,

प्रीत बलिहार जोगी झोली भरे सब दी,

ताहियो ओहदे विच झलक पेंदी रब दी,

ओह्दी शक्ति है सब तो आपार दीदार मैं भी पाना नाथ दा,

मैं ते जोगी दे मंदिरा नु जाना जोगी ने मैनु आप सदया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।