॥ पावन पाठ ॥
मैं तो तेरी शरण में आया, प्रभु जी तेरी शरण में आया
इस जग का मैं हूँ सताया,
मैं तो तेरी शरण में आया, प्रभु जी...
तूने मुझ को नयन ज्योति दी, तुझ को ही ना पाया
दर दर भटका हूँ इस जग में, फिर भी समझ ना पाया
मैं अब तो घबराया, प्रभु जी, मैं अब तो घबराया
मैं तो तेरी शरण में आया, प्रभु जी...
मैंने सुना है तू है दयालु, और बड़ा ही दानी
तुझ को भुला कर मैं इस जग में करता रहा मनमानी
मैं अब तो शर्मामा, प्रभु जी, मई अब तो शरमाया
मैं तो तेरी शरण में आया, प्रभु जी...
तूने मुझ को जीवन सौंपा, कुछ ही किया न अर्पण
काया जिसको रोज निहारे टूट गया वो दर्पण
मैं अब तो घबराया, प्रबु जी मैं अब तो घबराया
मैं तो तेरी शरण में आया, प्रभु जी...