मैं तो तेरी शरण में आया

स्वामी भुवनेश्वरी देवी जी महाराज
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॥ पावन पाठ ॥

मैं तो तेरी शरण में आया, प्रभु जी तेरी शरण में आया

इस जग का मैं हूँ सताया,

मैं तो तेरी शरण में आया, प्रभु जी...

तूने मुझ को नयन ज्योति दी, तुझ को ही ना पाया

दर दर भटका हूँ इस जग में, फिर भी समझ ना पाया

मैं अब तो घबराया, प्रभु जी, मैं अब तो घबराया

मैं तो तेरी शरण में आया, प्रभु जी...

मैंने सुना है तू है दयालु, और बड़ा ही दानी

तुझ को भुला कर मैं इस जग में करता रहा मनमानी

मैं अब तो शर्मामा, प्रभु जी, मई अब तो शरमाया

मैं तो तेरी शरण में आया, प्रभु जी...

तूने मुझ को जीवन सौंपा, कुछ ही किया न अर्पण

काया जिसको रोज निहारे टूट गया वो दर्पण

मैं अब तो घबराया, प्रबु जी मैं अब तो घबराया

मैं तो तेरी शरण में आया, प्रभु जी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।