तेरे हाथो में है डोर सांवरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हम सब है कट पुतली तेरे हाथो में है डोर,

नचाले कान्हा जैसे नाचे है मन में मोर,

तेरे हाथो में है डोर सांवरे,

तुझपे भरोसा मुझे तेरा ही सहारा,

डूभी हुई नैया का तू ही किनारा,

थाम ले मेरी बइयाँ दुःख के बदल है गणगौर,

नचाले कान्हा जैसे नाचे है मन में मोर,

जग में जो नचा बाबा नाचता रहुगा,

दुःख के खपेड़े बोलो कब तक सहूगा,

और साहा न जाए अब पकडू किसका छोर,

नचाले कान्हा जैसे नाचे है मन में मोर,

तेरे हाथो में है डोर सांवरे,

रूभी रिधम ने तेरे तेर लगाई हर पल बाबा तेरी महिमा है गई,

मुझको भी शरण में रखलो मेरा तुझबीण न कोई और,

नचाले कान्हा जैसे नाचे है मन में मोर,

तेरे हाथो में है डोर सांवरे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।