झर झर बरसे नैना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

खाटू वाले तेरे रहते झर झर बरसे नैना,

इतना बता दे ये दुःख मुझको कब तक और है सेहना,

झर झर बरसे नैना,

तुझको निहारु मैं तुझको पुकारू मैं,

सुनता नहीं क्यों बात मेरी तू इतना तू क्यों तड़पाये,

क्यों न हाथ बढ़ाये,या तो कह दे छोड़ दू मैं तुझसे,

अब मैं कुछ भी कहना,

झर झर बरसे नैना........

तुमसे ही आस बंधी सुख की प्यास जगी,

किस दर जाऊ किस को रिजाऊ,

दिल तेरा क्यों न पसीजे बैठा है अँखियाँ मीचे,

भव सागर के तूफानों में कब तक और है बहना,

झर झर बरसे नैना,

हारे का सहारा है सब को भा रहा है,

सुन ओ कन्हियाँ मेरी भी नाइयाँ क्यों न पार लगाये,

दास ये डूभ न जाये,मैं भी हु हारा देदे सहारा,

तुझ बिन अब नहीं है रहना,

झर झर बरसे नैना,

मैं भी हु दास तेरा,तू विश्वाश मेरा,

सिर पर मेरे हाथ जो फेरे सुन ने ओ सांवरियां,

चोखानी के तुझ बिन बाबा कट ते नहीं दिन रहना,

झर झर बरसे नैना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।