बाबा जी तेरे नाम दी इक माला लवा परो

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॥ पावन पाठ ॥

बाबा जी तेरे नाम दी इक माला लवा परो,

दिल विच रख लवा साम्ब के एह जो मैले कदे न हो,

बाबा जी तेरे नाम दी इक माला लवा परो

इस दुनिया दा मालिक है तू सबना न दा प्रित पालक है तू,

मेरी इस जीवन ज्योति दी दयो अमृत कर देयो,

बाबा जी तेरे नाम दी इक माला लवा परो

एह सिद्ध जोगी पौनाहारी तू ही कलयुग दा अवतारी,

तेरा मेरा मेल रहे यो फुल्ला संग खुशबू,

बाबा जी तेरे नाम दी इक माला लवा परो

जो भी तेरी ओट ते चावे उस नु तोट कोई भी न आवे,

इस ली लढ़ फडया तेरा छड के दुनिया विमोल.

बाबा जी तेरे नाम दी इक माला लवा परो

नाम जपा तेरा उठ्दा बेह्न्दा सरहाली दा कुल्हा कहंदा,

मन दी मेल गवा के मैं तेरे दर ते गया खलो,

बाबा जी तेरे नाम दी इक माला लवा परो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।