सिद्ध जोगी पौणाहारी तेरी याद सताती है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन बाबा बालक नाथ भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सिद्ध जोगी पौणाहारी तेरी याद सताती है,

माता रतनो तेरी तुझको तुझे घर पे भुलाती है,

सिद्ध जोगी पौणाहारी तेरी याद सताती है,

ख्याबो में आकर तुम मुझे दर्श दिखते हो,

जब हाथ लगाती हु,

मेरी आँख खुल जाती है,

सिद्ध जोगी पौणाहारी तेरी याद सताती है,

इल्जाम लगाये जो तेरे ऊपर सिद्ध जोगी,

सब की बातो में मैं आकर तेरी माँ पश्ताती है,

सिद्ध जोगी पौणाहारी तेरी याद सताती है,

करन खन्ना ये लिखता है सिद्ध जोगी पौणाहारी,

बाते सुन कर माँ रत्नो की मेरी आंख भर आती है,

सिद्ध जोगी पौणाहारी तेरी याद सताती है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।