लिख साहनु भी तू चिठियाँ पा माता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

इक तू हॉवे इक मैं होवा,

कदे साहनु भी तू दर्श दिखा माता,

लिख साहनु भी तू चिठियाँ पा माता,

सोहना तेरा है द्वारा जिथे रेह्न्दियाँ बहारा,

कदे साहनु भी तू कोल बुला माता,

लिख साहनु भी तू चिठियाँ पा माता,

आउंदे ने हर साल नवराते आके लंग जन्दे,

साहनु ता एह दिन तेरे तड़पा के लंग जन्दे,

तू है शक्ति महान लवे दिला दिया जान,

दस साहनु काटो रही तड़पा माता,

लिख साहनु भी तू चिठियाँ पा माता,

दिल विच मेरे तांग बड़ी है तेरे दीदार दी,

मैनु भी कदे कोल भुला पा खैर प्यारा दी,

दस कदो दर आइये आके झोलियाँ भराइये,

ज्योता तलियाँ ते आवा गे जगा माता,

लिख साहनु भी तू चिठियाँ पा माता,

केहड़ी ग्लो मुख साढ़े तो मोड़ी बैठी माँ,

माँ पूत वाला नाता काटो तोड़ी बैठी माँ,

मनो मखन दा कहना जिहदा पिंड सोहना सहना,

तुहाडी किरपा ते वसदा गरा माता,

लिख साहनु भी तू चिठियाँ पा माता,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।