हुन तनु की आखा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

इक पल तनु न मैं दिल को भुलाया,

किथे जाके जोगियां तू डेरा दस लाया,

आये दर्श तेरे दी लेके आस,

हुन तनु की आखा भोला कवा के नाथ हुन तनु की आखा,

दुनिया है सारी तनु भोला बाबा कहंदा है,

गंगा मइयां तेरिया जटावा विच बेहंदी है,,

तेरे डमरू दी है मीठी आवाज हुन तनु की आखा,

भोला कवा के नाथ हुन तनु की आखा....

दुनिया दा खेड़ सारे भोले तू रच्या है,

ज़ेहरियाँ सप्पा नु हार गल दा बनाया है,

पिंडे मल बैठा सिविया दी राख,हुन तनु की आखा,

भोला कवा के नाथ हुन तनु की आखा....

गोरा मैया नाल तेरी जोड़ी बड़ी न्यारी है,

दुनिया तो वख नंदी बैल दी सवारी है,

नाल गणपति पुत्र दा साथ,हुन तनु की आखा,

भोला कवा के नाथ हुन तनु की आखा....

चन्देर चहल दी मुराद पूरी करदे ,

लहरें वाले दीपक ते मेहर भोले करदे,

देके दर्श भुजादे आज प्यास.हुन तनु की आखा,

भोला कवा के नाथ हुन तनु की आखा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।