बाबा के दिल में बच्चे रहते

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

बाबा के दिल में बच्चे रहते बच्चों के दिल में बाबा,

बाबा कहते मेरे बच्चे बच्चे कहे मेरे बाबा,

बा बच्चे बा बा बाबा बा,

इक पल भी जुदा न हो सकदे है ऐसा रिश्ता,

इन आँखों में इन सांसो में बाबा बाबा दिखदा,

वाह मेरी किस्मत वाह वह परिवार वाह

बाबा के दिल में बच्चे रहते बच्चों के दिल में बाबा,

मेरा आत्म दी जगाया विशडा परिवार मिलाया,

एक जून की शक्ति में मानव को देव बनाया,

वाह मेरी किस्मत वाह मेरा जीवन वाह,

बाबा के दिल में बच्चे रहते बच्चों के दिल में बाबा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।