ऐसे न छेड़ो तुम कान्हा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ऐसे न छेड़ो तुम कान्हा क्यों करते हर बार,

आखिर मुझको भी तुमसे प्यार,

ओ कान्हा मेरे तेरे बिना हु बेकरार,

मुझको पता है सबका अकेला यार तू,

सब की चाहत का इकलौता यार तू,

फिर भी हम को तुमसे ही महोबत है,

मेरे भी सपनो का है संसार तू,

इक दिन सुनो गे मेरा दिल कहता बारम वार,

आखिर मुझको भी तुमसे प्यार,

ओ कान्हा मेरे तेरे बिना हु बेकरार,

जान भुज कर तुमसे पीछे हट ती हु,

इन दुनिया वाले से मैं तो डरती हु,

तेरे बिना न ऐसे ही रह पाओगी,

दिल का हाल मैं तुम से व्यान करती हु,

मेरी इस कोशिश को करो न कान्हा तुम बेकार,

आखिर मुझको भी तुमसे प्यार,

ओ कान्हा मेरे तेरे बिना हु बेकरार,

तेरी हुई दीवानी कान्हा सदियों से,

तू ही पीछे हटता मेरी कमियों से,

अपना बनाने मुझको ये सौगात दे,

वरना हाथ मैं धो बेठू गी जान से,

मैंने तुझको अपना बनाया तू भी बना ले यार,

आखिर मुझको भी तुमसे प्यार,

ओ कान्हा मेरे तेरे बिना हु बेकरार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।