देदे इक लाल भवानी माँ,

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी खोटी काटो लिखी तकदीर माँ,

दे दे इक लाल भवानी माँ,

भगे अखिया को छम छम नीर देदे इक लाल भवानी माँ,

मेरी खोटी काटो लिखी तकदीर माँ,

सखना सखना लगदा वेहड़ा पेंडियां जदो तकाला,

भाग लगावे गी कदो गोद मेरी न दिल मार दा छाला,

सोना पेन तकड़ी न इक हीर,देदे इक लाल भवानी माँ,

मेरी खोटी काटो लिखी तकदीर माँ,

पुत्र जी जेहा नाथ नहीं माये पा सीने ठण्ड पावा,

प्यास लगी जन माँ तो मैनु ला के प्यास भुजावा,

मेरा दिल नहीं भजदा तीर देदे इक लाल भवानी माँ,

मेरी खोटी काटो लिखी तकदीर माँ,

व्यास वाली अंश दे वंगु बन यु सेवक तेरी नी माये,

सिमु ते अंश दी माये पार करे गी कद वेहड़ी,

महिमा रात दिन गावे जसजीत,

देदे इक लाल भवानी माँ,

मेरी खोटी काटो लिखी तकदीर माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।