झुल्दा रही वे झंडियां बाबे दे द्वारे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

झुल्दा रही वे झंडियां बाबे दे द्वारे,

बाबे दे द्वारे पौणाहारी दे द्वारे.

झुल्दा रही वे झंडियां बाबे दे द्वारे,

बाबे दे द्वारे मामा जे आया,

माँ ने पुत्र मंगियां बाबे दे द्वारे,

झुल्दा रही वे झंडियां बाबे दे द्वारे,

बाबे दे द्वारे संगता ये आइया,

संगता ने सुख मंगिया बाबे दे द्वारे,

झुल्दा रही वे झंडियां बाबे दे द्वारे,

बाबे दे द्वारे बेहना जे ाइयाँ,

भेना ने पाई मंगया बाबे दे दवारे,

झुल्दा रही वे झंडियां बाबे दे द्वारे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।