पालकी साई तेरी पालकी

बलबीर निर्दोष
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॥ पावन पाठ ॥

पालकी साई तेरी पालकी,

वो है भाग्यवान जो उठाते तेरी पालकी,

श्रद्धा के फूलों से सजाते तेरी पालकी,

वो है भाग्यवान जो उठाते तेरी पालकी,

साई मेरा दिल करें मस्ती में झूम लू,

उन कारिंदो के हाथों को चूम लू ,

जिन प्यारे हाथों से बनाते तेरी पालकी,

वो है भाग्यवान जो उठाते तेरी पालकी,

शिरडी के साईं तेरी जिसमें सवारी है,

वो तो तीनों लोकों से लगती न्यारी है ,

तभी हम आखों में बसाते तेरी पालकी,

वो है भाग्यवान जो उठाते तेरी पालकी,

सुधा तेरी रहमतो की बाबा पिलाने को,

भक्तो की सोई तकदीरे जगाने को ,

निर्दोष भाव से घुमाते तेरी पालकी ,

वो है भाग्यवान जो उठाते तेरी पालकी

गायक - अजय सोनी

लेखक - बलबीर निर्दोष

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।