ओ जटाधारी आ

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ओ जटाधारी आ तेरे भक्त ने लाया जय जय कारा,

हरी ॐ नमः शिवाये हरी ॐ नमः शिवाये,

ओ जटाधारी आ तेरा सज्या कलेशा प्यारा,

ओ जटाधारी आ आसा देखना वो सूंदर नजारा,

हरी ॐ नमः शिवाये हरी ॐ नमः शिवाये,

ओ जटाधारी आ बजे डमरू कैलाशा ते तेरा,

ओ जटाधारी आ लाया उचिया पहाड़ा ते डेरा,

हरी ॐ नमः शिवाये हरी ॐ नमः शिवाये,

ओ जटाधारी आ गले स्र्प दी पाई ओ माला,

ओ जटाधारी आया बेल ते होइ स्वारा,

हरी ॐ नमः शिवाये हरी ॐ नमः शिवाये,

ओ जटाधारी आ पीजो भांग दा घोटा लगाया,

ओ जटाधारी आ तेरे मंदिर च नचना ते गौना,

हरी ॐ नमः शिवाये हरी ॐ नमः शिवाये,

ओ जटाधारी आ सब खुशिया तू झोली विच पाया,

हरी ॐ नमः शिवाये हरी ॐ नमः शिवाये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।