ना धन दौलत मांगू ना मांगू राज खजाना

पारंपरिक
माँ गंगा भजन विविध भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

ना धन दौलत मांगू ना मांगू राज खजाना,

अमृत घुट पिला गंगा माँ चरणों में तेरी ठिकाना,

ना धन दौलत मांगू ना मांगू राज खजाना,

कुंभ पर्व है आया माँ का अमृत जल है खेरा,

सारी दुनिया उम्र पड़ी है लगा कुंभ का मेला,

मुझ पर अपना प्रेम दिखा दो अम्र कित्यानी गंगा माँ,

भव सागर से पार लगा दो जगत तारणी गंगा माँ,

अपना आशिर्वाद है माँ का मुझपर सदा लुटाना,

ना धन दौलत मांगू ना मांगू राज खजाना,

सफल हो इस जग में आना माँ सत्कर्मो में लगा दे,

पाप साप अभिशाप मिटा के यश की ती फैला दे,

भटक रहे अँधेरे में जो अंतर ज्योति जला दे माँ,

सब का जीवन पावन करदे भक्तो पे दया दिखा दे माँ,.

भक्त जनो को सारे दुखो से माता सदा बचाना,

ना धन दौलत मांगू ना मांगू राज खजाना,

तू त्रिभुवन की तारणी माता महिमा तेरी अपार है,

वेद भावना कही को जन जन को देती प्यार है,

सब की बिगड़ी बनाने वाली विष्णु पत्नी जग माता है,

कितना भी कोई पापी हो जल से तेरे तर जाता है,

तेरी किरपा से मोक्श मिले मिट जाए आना जाना,

ना धन दौलत मांगू ना मांगू राज खजाना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।