श्याम सूंदर सा कोई भी सूंदर नहीं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जिसकी आँखों से गहरा समुंदर नहीं,

श्याम सूंदर सा कोई भी सूंदर नहीं,

उड़े जाती निराली घुंघराली लटा,

जैसे भादो के सूरज की काली घटा,

मेरे बांके बिहारी की न्यारी छटा,

अति प्यारी छटा मत वरि छटा,

वनवारी सा देखा न मुंदर कही,

जिसकी आँखों से गहरा समुन्दर नहीं,

श्याम सूंदर सा कोई भी सूंदर नहीं,

नैन कजरारे अधरों पे रस पान है,

दांत मोती से फूलो सी मुश्कान है,

बोल मीठे लगे जैसे मिष्ठान है

ये तो पहचान है वो तो धन वान है,

ऐसा रंग दे सके रंग चुकंदर नहीं,

जिसकी आँखों से गहरा समुन्दर नहीं,

श्याम सूंदर सा कोई भी सूंदर नहीं,

जिसके चेहरे पे विखरा गज़ब नूर है,

मुख मंडल पे लाली माँ भरपूर है,

रूप देखा तो लागे कोहिनूर है,

बांका दस्तूर है हरी मगरूर है,

मेरे कान्हा सा दूजा मुजनदर नहीं,

जिसकी आँखों से गहरा समुन्दर नहीं,

श्याम सूंदर सा कोई भी सूंदर नहीं,

नजरे हटती नहीं सोहनी सूरत है वो,

मन को मोह ले जो मन मोहनी मूरत है वो,

सब ने बोलै बड़ा खूबसूरत है वो,

हां जरूत है वो सुबह महूरत है वो,

अपना करले बिजन जैसा हुनर नहीं,

जिसकी आँखों से गहरा समुन्दर नहीं,

श्याम सूंदर सा कोई भी सूंदर नहीं,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।