लाखों महफिल जहाँ में यु तो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

लाखों महफिल जहाँ में यु तो,

तेरी महफ़िल सी महफ़िल नहीं है,

स्वर्ग सम्राट हो या हो चकार,

तेरे दर पे है दरजा बराबर,

तेरी हस्ती को जिसने जाना कोई आलम में आखिर नहीं है,

दर बेदर्द खा के ठोकर जो थक के आ गया कोई तेरे दर पर,

तूने नजरो से जो रस पिलाया वो बचाने के काबिल नहीं है,

लाखों महफिल जहाँ में यु तो,

तेरी महफ़िल सी महफ़िल नहीं है,

जीते मरते जो तेरी लग्न में जलते रहते विरहे की अगन में,

है भरोसा तेरा इ मुरारी तू दयालु है कातिल नहीं है,

तेरा रस का चस्खा लगा जिसको लगा बैकुंठ फीका उसको,

डूभ कर कोई बाहर ना आया इस में ववरे है साहिल नहीं है

लाखों महफिल जहाँ में यु तो,

तेरी महफ़िल सी महफ़िल नहीं है,

कर्म उनकी है निष्काम सेवा ब्रम्ह है उनकी ईशा में ईशा,

सौंप दो इनके हाथो में डोरी ये किरपालु है टंगतिल नहीं है,

लाखों महफिल जहाँ में यु तो,

तेरी महफ़िल सी महफ़िल नहीं है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।