अब तो आजा सांवरिया रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अब तो आजा सांवरिया रे

अब तो आजा सांवरिया रे

जिन्हें देखने को जिए जा रहें हैं

वो पर्दा पे पर्दा किये जा रहें हैं

निकल आओ परदे से बांके बिहारी

हमें तेरा पर्दा गंवारा नहीं है

प्यारे पर्दा हटा लो ज़रा मुख से

रुख महफ़िल में एकदम बदल जायेगा

जो बेहोश हैं होश में आएंगे

गिरनेवाला भी फिर से संभल जायेगा

अब तो आजा

अब तो आजा

अब तो आजा सांवरिया रे

अब तो आजा सांवरिया रे

बताओ यूँ परदे में कब तक छिपोगे

तुम्हें मुख से पर्दा हटाना पड़ेगा

मुबारक हो तुमको ये मेरी मोहोबत

तुम्हें सामने मेरे आना पड़ेगा

अब तो आजा

अब तो आजा

अब तो आजा सांवरिया रे

अब तो आजा सांवरिया रे

तुम मेरे पास बैठो तसल्ली न हो

वक़्त मेरा भी अच्छा गुजर जायेगा

ये क्या कम है मशीहा तेरे आने से

मौत का भी इरादा बदल जायेगा

अब तो आजा

अब तो आजा

अब तो आजा सांवरिया रे

अब तो आजा सांवरिया रे

हम देखेंगे तुम कब तक ना मिलोगे

और कब तक महर ये नज़र ना करोगे

आएगा एक दिन ऐसा जमाना

हम रुठेंगे तुमको मनाना पड़ेगा

अब तो आजा

अब तो आजा

अब तो आजा सांवरिया रे

अब तो आजा सांवरिया रे

तुम जान अयोग्य बिसारो मुझे

पर मैं न तुम्हें बिसराया करुँ

मेरी इसमें ख़ुशी तुम रूठा करो

मैं अकेले में तुमको मनाया करूँ

मेरे रोने से तुमको जो आये हंसी

हम रो रो के तुमको मनाया करेंगे

तेरे चरणों की धूलि को चन्दन समझ

मैं तो माथे पे अपनी लगाया करुँगी

अब तो आजा

अब तो आजा

अब तो आजा सांवरिया रे

अब तो आजा सांवरिया रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।