राखूं कालजे में भगतां को परिवार

सौरभ मधुकर
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

परिचय : भगतो पर जब भी संकट के बादल मंडराते है,माँ की लाल चुनरिया बच्चो की सिर पर ममता की छाया बनकर ढक लेती है | कुछ ऐसे ही भावो को माँ अपने भगतो के लिए कहना चाहती है |

पल्लो चुनरी को गेर,ढक कर राखूं चारूं मेर

काई कर लेसी ओ सारो संसार देखले

रांखू कालजे में भगतां को परिवार देखले

दिन भर मेरे कालजे में झाँक झाँक कर देखू मैं

सारी सारी रात न सोऊ,जाग जाग कर देखू मैं

थाने देखती रहू मैं , सौ सौ बार देखले

रांखू कालजे में भगतां को परिवार देखले

पल्लो चुनरी को गेर,ढक कर राखूं चारूं मेर

काई कर लेसी ओ सारो संसार देखले

रांखू कालजे में भगतां को परिवार देखले

संपर्क - +919339973957

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।