अरदास करा

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॥ पावन पाठ ॥

रब्बा करी मैनु माफ़, आपे करी इन्साफ

मंगा दूसरे दी खेर, दिलो कड़ी सारे वेर

चँगे अमल कमा ले, लो रब नाल ला ले

छड़ लालचा दे जान, करी रब उत्ते मान,

जिदे हथ विच तेरिया ने सावा

अरदास करा अरदास करा,

हर दिल अंदर तैनू साईया मैं तलाश करा

घर किसे दा ना लुटे, आस किसे दी ना टूटे,

वंडी सुखा दिया छावा, रब्बा मरण ना मावा

पुत माँ पया दे प्यारे, रूल जान ना बेचारे,

धीया हसदिया रेहन, सदा वसदिया रेहन

बाप सर उत्ते रहन, कदे दूरिया ना पहन,

रब्बा बहना तो भरा, कदे होण ना जुदा,

सुन लवी मेरिया दुवावा

खेत हरे भरे रेहन, मिले पंछिया नू चेन,

जेडे उड़ दे परिंदे, फड़ लेन ना दरिंदे,

ईवे भावे बेजुबान, हुंदी ऐना विच जान,

इववे वेर ना कमाओ, चोगा प्यार वाला पाओ,

रब rij के पचनदा, भूखा कदे ना सुलनादा,

दुःख सुन ले खुदा, लगे तत्ती ना हवा,

सदा ठंडिया ही चलन हवावा

घट कदे ना कोई तोले, बोल मिट्ठे मिट्ठे बोले,

सच्चा इश्क़ कमा ले , यार नच के मना ले

जेड़ा करे मजदूरी, हुंदी कोई मजबुरी

जिदी नियत है खोटी, देवी ऊसनु वी रोटी

जेड़ा पथरा च रेह्न्दा, ओ वी तेरे कोलो लेंदा

तेरा ना जद लेंदा, रब्बा सादक ए केंदा

करी सरेया ते चांगिया निगावा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।