प्यारे कान्हा बजाये मधुर बाँसुरी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

शेयर- श्याम राधे कभी ना थे, थे बस राधे श्याम,

जन्म जन्म के भाग्य जगादे, इक राधा को नाम,

प्यारे कान्हा बजाये मधुर बाँसुरी, दिल राधा का जिससे चले,

धीरे धीरे पवन नाचे राधे का मन,जैसे नदियाँ में नइया चले,

आज सपनोँ की नगरी में खो जायेगी,

आज कान्हा पीया की वो हो जायेगी,

ऐसी लगी राधा को महाराज की,

जैसे प्यासे को पानी लगे,,,,,,,

कोऊ मालिक है और कोऊ मोहताज़ है,

इसमें राधा कान्हा की कहा बात है,

राधा कान्हा में गुंम गाये उसके ही गुण,

जैसे राही को मंज़िल मिले,,,

आ सांवरिया वो कब से तेरी चाह में,

नैन बन के बिछी है तेरी राह में,

तेरे मन का दिया जल रहा है पीया,

वैरी चन्दा जले ना जले,,,,

पंडित देव शर्मा

श्री दुर्गा संकीर्तन मंडल

रानिया(सिरसा)

७५८९२१८७९७

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।