मंदिर दे कोन्या च

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मंदिर दे कोन्या च दे दे कोई कोना माँ,

जित्थे बह के रो लाइए उमरा दा रोना माँ,

लोका अग्गे रोन वाले बनदे मखौल ने ,

हंजूवा दे मोती लोकी पथरा च तोल दे,

दुजया दा दुःख हुंदा लोका लई खिडोना माँ

जित्थे बह के रो लाइए उमरा दा रोना माँ,

दिला दा गुमार दस कीद्दे अगे के कडिये,

पलड़ा उदासिया दा कीद्दे अगे अडिये,

कोई तेरे जेहा हमदर्द नइयो होना माँ,

जित्थे बह के रो लाइए उमरा दा रोना माँ,

अपने नसीबा उत्ते चलदा न जोर माँ,

हारेया बच्या ते करे कोण गौर माँ ,

दुःख अपना के अस्सा आप ही ढोना माँ,

जित्थे बह के रो लाइए उमरा दा रोना माँ,

केहन नू ते साथी सारे चतर चलाक ने ,

डुब डुब जांदे चंगे चंगे तैराक ने ,

साहिल ते वेख्या ए डुबना डुबोना माँ,

जित्थे बह के रो लाइए उमरा दा रोना माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।