ना बंद करीं

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ना बंद करीं दरवजा, अस्सा कल फिर आऊँना ऐं,

जो अज्ज सहनु मिलिया नहीं, कल लै के जाना ऐं।

तेरे दर तक आवन लई कोई मुश्किल आयी नहीं,

एह वखरी गल है माँ होई सुनवाई नहीं,

कुझ गल्लां करनीयां ने, कुझ हाल सुनाऊँना ऐं,,,,,,,,

तेरी मूरत तक्क के माँ तक्कदा ही रह गया हाँ,

कुझ पत्ता नहीं चल्लेया तैनू की कुझ कह गया हाँ,

अम्बे तेरी मोहनी मूरत का हर कोई दीवाना ऐं,,,,,,,

पंडित सेव शर्मा

श्री दुर्गा संकीर्तन मंडल

रानियां (सिरसा)

७५८९२१८७९७

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।