सारे रल मिल के जय माँ जय माँ कहिये

पारंपरिक
श्री गणेश भजन दुर्गा भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

सब तो पहला ज्योत जगा के माँ दे चरनी शीश झुका के,

श्रद्धा नाल गणेश मना के,टिल फूल भेटा गाइये,

सारे रल मिल के जय माँ जय माँ कहिये,

सोहना माँ दा रूप निराला मुख सोहने दा गल विच माला,

धान हो जन्दा देखन वाला पीछे काह्नु खड़िये

सारे रल मिल के जय माँ जय माँ कहिये,

माँ मेरी दे दर जो आवे,

मुहो मंग मुरादा पावे,

मैया जी मेहरा बरसावे आजो झोली भरिये,

सारे रल मिल के जय माँ जय माँ कहिये,

दाती कर के शेर सवारी आई जागे विच माँ प्यारी,

संगता न जांदी है तारी माँ के दर्शन करिये,

सारे रल मिल के जय माँ जय माँ कहिये,

माँ दी महिमा लिखने वाला सत्ता जी दा पिंड लेग्याना,

तुसी किरण दा साथ निभाना आजो चोंकि भरिये,

सारे रल मिल के जय माँ जय माँ कहिये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।