रंग चढ़ गये दाती दे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

रंग चढ़ गये दाती दे झूमदे मस्ती दे विच सारे,

ऊंची ऊंची शेरावाली दे ऊंची ऊंची माँ आंबे दे लौण्डे फिरन जैकारे,

रंग चढ़ गये दाती दे झूमदे मस्ती दे विच सारे,

मस्त मस्त जेहा समय हो गया कैसी मस्ती छाई,

सब भगता ते आंबे माँ रेहमत जाएं बरसाई,

आज मैया ने ओना ही ओना करलो दर्शन सारे,

रंग चढ़ गये दाती दे झूमदे मस्ती दे विच सारे,

सते भेना पींगा झुटन कैसा अज़ब नजारा,

जिस तकया ओ कर्मा वाला माँ दा भगत प्यारा,

माँ दा नाम ले तू भी तोड़ ले अम्बर तो तारे

रंग चढ़ गये दाती दे झूमदे मस्ती दे विच सारे,

नूरमेहलिया सूखा लिखदे गुलाम अली आज रोंदा,

माँ मेरी दी ऐसी महिमा सारा जग वाड्योंदा,

माँ दे चरनी आ गये आज ऐसी सारे कर्मा वाले,

रंग चढ़ गये दाती दे झूमदे मस्ती दे विच सारे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।