आज नचना मैं मईया दे द्वारे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

किती मेहर मेरे उते महारानी ने,

छड़ी कोई भी न घाट जग जानी ने,

दिल करे मेरा माँ दी भर कवली ऊंची ऊंची ख़ुशी च जयकारे,

पैरा च पंजेब दी थी पा ले घुंगरू आज नचना मैं मईया दे द्वारे,

हथा उते मेहँदी लाके रंग मैं चढ़ा लिया है,

लाल गुडा मईया जी दे नाम दा,

लाल फुलकारी लिटी लाल पाइया वंगा बड़ा लाल रंग मियां न सुहाव दा,

सच्चे दिलो मैनु माँ दी लग गई लग्न सारे कम मेरी दाती ने सवारे,

पैरा च पंजेब दी थी पा ले घुंगरू आज नचना मैं मईया दे द्वारे,

रीज नाल सूट भी समाया सुहे रंग दा मैं जाना माँ दे दर्शन पौन नु,

करने दीदार माँ दे चढ़ के चढ़ाइयाँ बोहति करनी नहीं काली मुद आऊं नु ,

जेहड़ा भी भगत मियां दी ज्योत नु जगावे मियां कर दिंडी पार उतारे,

पैरा च पंजेब दी थी पा ले घुंगरू आज नचना मैं मईया दे द्वारे,

रेहमता दे नाल मेरी झोली भर दिति ख़ुशी मेतो जन्दी न संभाली है,

लिखियाँ है सच सुखबीर ने कलम विच बड़ी माँ दयालु शेरावाली है,

किरपा दा हथ रखी मनवीर उते एही करा अरजोई सरकारे,

पैरा च पंजेब दी थी पा ले घुंगरू आज नचना मैं मईया दे द्वारे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।