तेरा रज रज करना दीदार छेटी छेटी आजा जोगियां

पारंपरिक
माँ गंगा आरती बाबा बालक नाथ भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

तेरा रज रज करना दीदार छेटी छेटी आजा जोगियां,

हाथ जोड़ जोड़ कहन्दे सेवादार मुखड़ा दिखा जा जोगियां,

तेरा रज रज करना दीदार छेटी छेटी आजा जोगियां,

आरती करा गे तेल रहा विच चोवा गे गंगा जल नाल तेरे चरना नु धोवा गे,

तेरे रूप उतो जावा बलिहार मुखड़ा दिखा जा जोगियां,

तेरा रज रज करना दीदार छेटी छेटी आजा जोगियां,

उंगला ते पोटे पोटे पोटेया ते याद किता है,

एहने नही साह जिह्ना तेरा नाम लिता है,

साडे चावा नु न करी तार तार,

छेटी छेटी आजा जोगियां...........

सबर साडे नु तू भोहता ना तू अजमाई वे,

औना के नि औना गल मुकदी मुकाई वे,

तेतो मंगदे नही लख ते हजार,

इक वारी आजा जोगियां,

तेरा रज रज करना दीदार छेटी छेटी आजा जोगियां,

आसा ते उमीदा जोगी तेरे उते राखियाँ कोमल जालंधरी भी बिठा के बेठा अखियाँ,

होर हुंदा नही साथो इंतज़ार झलक दिखा जा जोगियां,

तेरा रज रज करना दीदार छेटी छेटी आजा जोगियां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।