जब भी दुःख आता है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन साईं भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जब भी दुःख आता है तो शिरडी में आ जाते है लोग,

बिना दवा के मेरे साई मिटा ते है रोग,

टूटी मस्जिद थी वहाँ जिसमे वो रहने लगा,

बैठ ता कोने में धुनि रमता ही रहा,

देख दुनिया की ये हालत को जो बन जाते है यो,

बिना दवा के मेरे साई मिटा ते है रोग,

जब हुई धर्म की हानि तब ये अवतार हुआ,

कोई न जाने इसे कौन है माता पिता,

धुनि रमता ही रहा मिटने लगे लाखो के रोग,

बिना दवा के मेरे साई मिटा ते है रोग,

ईट मसिजद में गिरी बाबा रोने ही लगे,

कर्म की फुट गया दिल भिखरने ही लगे,

लौट कर आएंगे मेरे बाबा ये कह जाते है लोग,

बिना दवा के मेरे साई मिटा ते है रोग,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।