ऐ वतन आबाद रहे तू

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॥ पावन पाठ ॥

ऐ वतन मेरे वतन,

ऐ वतन आबाद रहे तू,

ऐ वतन वतन मेरे आबाद रहे तू,

मैं यहाँ रहु जहां में याद रहे तू,

ऐ वतन मेरे वतन,

तू ही मेरी मंजिल है पहचान तुजी से,

पौंचू मैं याहा भी मेरी बुन्याद रहे तू,

ऐ वतन मेरे वतन....

तुझपे कोई गम आंच आने नहीं दू,

कुर्बान मेरी जान तुझपे शान रहे तू,

ऐ वतन मेरे वतन,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।