मेरे मन में तेरा वृद्धावन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे मन में तेरा वृद्धावन,

मेरी आँखों में तस्वीर तेरी,

मुझे जब से तेरी लगन लगी,

बदल गई तकदीर मेरी,

मेरे मन में तेरा वृद्धावन,

धड़कन में तू ही समाया है,

है रोम रोम में तू ही तू,

सांसो ने जब तेरा ध्यान किया आ गया मेरे तू रुबरु ,

कदमो में थी यो तृष्णा थी टूट गई जंजीर मेरी,

मेरे मन में तेरा वृद्धावन,

मैं देखु यहाँ नजरो को वहा अब तू ही दिखाई देता है,

अपनी मोहक मुस्कान से तू मेरा सारा दुःख हर लेता है,

बरसो तड़पाया है जिसने दुरी हुई वो पीड़ मेरी,

मेरे मन में तेरा वृद्धावन,

धरती पे जब भी जन्म मिले गोपाल तेरा गुण गाउ मैं,

इक बार पकड़ ले बाह मेरी भव सागर से तर जाऊ मैं,

करती है विनती कर जोड़ बलजीत की आंखे नीर बरी,

मेरे मन में तेरा वृद्धावन,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।