धमानवाली माँ बदलती तकदीरें

सौरभ मधुकर
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कभी जल्दी जल्दी,कभी धीरे धीरे

धमानवाली माँ बदलती तकदीरें

कभी जल्दी जल्दी,कभी धीरे धीरे

मेरी भोड़कीवाली माँ बदलती तकदीरें

कहते है कोई बदल न पाता है हांथो की रेखा

पर ये करिश्मा करते माँ को रोज ही हमने देखा

तभी तो ये दुनिया दीवानी इसकी रे

धमानवाली माँ बदलती तकदीरें

दीन-दुखी लाखों ही आते है मइया के द्वारे

बारी बारी से मेरी मइया सबके काज सँवारे

यहाँ पर तो भर्ती झोलियाँ सबकी रे

धमानवाली माँ बदलती तकदीरें

अगर भरोसा सच्चा हो तो काम बने इक पल में

देर उन्ही को लगती जिनके संका रहती दिल में

कहे सोनू रखो भावना सच्ची रे

धमानवाली माँ बदलती तकदीरें

कभी जल्दी जल्दी,कभी धीरे धीरे

धमानवाली माँ बदलती तकदीरें

कभी जल्दी जल्दी,कभी धीरे धीरे

मेरी भोड़कीवाली माँ बदलती तकदीरें

संपर्क - +919831258090

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।