जय जय शिवनंद गणेश जी

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

जय जय शिव नंद गणेश जी

तर्ज़- है प्रीत जहां की रीत सदां

जय हो जय हो,जय हो जय हो, जय हो जय हो,

जय हो लाल जी.....

जय जय शिवनंद गणेश जी, असीं तेरा नाम ध्यान्दे हां,

असीं त्रिलोकी दे दाते नूँ, हथ जोड़ के शीश झुकाउंदे हाँ,

जय हो जय हो ........

तूँ सर्व कला दा मालिक है तेरी मूसे दी सवारी है,

मस्तक पे तिलक विराजे है सिर मुकुट की शोभा न्यारी है,

करके पूजा शिवनंदन की,असीं अपने- भाग्य जगांदे हाँ,

असीं त्रिलोकी दे दाते नूँ,,,,,,

जय हो जय हो,,,,,,

कई भुल्लां भुल्लन हार करण फिर माफ़ करें तूँ ऐ दाता,

कोई खाली ना जावे दर तो इंसाफ करे तूँ ऐ दाता,

तेरा दित्ता ही सब खांदे ने,असीं अपना- भार चुकांदे हां,

असीं त्रिलोकी दे दाते नूँ,,,,,,

जय हो जय हो,,,,,,

पण्डित देव शर्मा बृजवासी

श्री दुर्गा संकीर्तन मण्डल

रानियां(सिरसा)

७५८९२१८७९७

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।