प्यासा हिरन जैसे ढूंढे है जल को

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॥ पावन पाठ ॥

प्यासा हिरन जैसे ढूंढे है जल को,

ऐसे प्रभु मैं तुझे ढूंढ रहा,

ऐसे प्रभु मैं तुझको खोज रहा,

प्यासा हिरन जैसे ढूंढे है जल को,

सोना चांदी मैं तो ना मांगू,

मन तेरे प्रेम से रचता रहु मैं,

ऐसे प्रभु मैं तुझे ढूंढ रहा,

ऐसे प्रभु मैं तुझको खोज रहा,

तुम ही मेरे मन की अभिलाषा,

पूजा तेरी नित नित करता रहु मैं,

ऐसे प्रभु मैं तुझे ढूंढ रहा,

ऐसे प्रभु मैं तुझको खोज रहा,

तू जो मेरे मन में वास करे,

पाप से निश दिन बचता रहु मैं,

ऐसे प्रभु मैं तुझे ढूंढ रहा,

ऐसे प्रभु मैं तुझको खोज रहा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।