याद आई याद आई

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॥ पावन पाठ ॥

याद आई याद आई याद आई याद आई,

साईं की याद आई साईं की याद आई,

रोते रोते सो गये सपने में साईं बाबा तेरे दर्शन हो गये,

मुखड़ा दिखाया दुखड़ा मिटाया साईं ने मुझको अपना बनाया,

जितने थे दुःख और संकट सारे मेरे खो गये,

सपने में मेरे साईं बाबा तेरे दर्शन हो गये,

साईं की याद आई ........

दुःख में न कोई संगी साथी,

बाते न समझा कोई मेरी जरा सी,

उस पे ना मुसीबत जो साईं के हो गये,

सपने में साईं बाबा तेरे दर्शन हो गये,

साईं की याद आई .......

साईं के जैसा कौन धनि है,

तेरे दर पे न कोई कमी है,

मेरा साईं है मेरा कोई चाहे जो कहे,

सपने में साईं बाबा तेरे दर्शन हो गये,

साईं की याद आई साईं की याद आई,

धरती अम्बर ये जग सारा जपता है साईं नाम तुम्हारा,

सब को देते है सहारा शिर्डी में जो गये,

सपने में साईं बाबा तेरे दर्शन हो गये,

साईं की याद आई साईं की याद आई,

दास हयात की लाज बचाई मेरी उम्र भर की येही है कमाई,

अनसु जो पहन खिले थे दामन में समो गये,

सपने में साईं बाबा तेरे दर्शन हो गये,

साईं की याद आई साईं की याद आई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।