तू रह सैयां दा होके इक दिन तर जाएगा

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॥ पावन पाठ ॥

होक रह सैयां दा होक रह मस्त दा,

तू रह सैयां दा तू रह मस्ता दा,

तू रह सैयां दा होके इक दिन तर जाएगा,

खाली नहीं तू रहना इक दिन भर जाए गा,

तू रह सैयां दा होके इक दिन तर जाएगा,

राह है थोड़ा औखा जे तू कर जाएगा,

की इस ग्लो लभना जे तू डर जाएगा,

कर म्हणत तू भी सजना नहीं ते हर जाएगा,

तू रह सैयां दा होके इक दिन तर जाएगा,

दुःख दर्द सब है के जे तू जर जायेगा,

विच आगा दे बह तू ठर जायेगा,

इक दिन बनके बदली तू भी वर जायेगा,

तू रह सैयां दा होके इक दिन तर जाएगा,

अंदर सबर जे तेरे सौदा खट जाएगा,

जो वतन आया दुनिया ते ओ तू वट जायेगा,

जे मन दा सौदा सैयां आगे धार जायेगा,

तू रह सैयां दा होके इक दिन तर जाएगा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।