चल भगता दर माँ दे चलिये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चल भगता दर माँ दे चलिये,

आ गिया अशु दे महीने रुता प्यारियाँ,

वाण गंगा दा ठंडा पानी वाण गंगा दा निर्मल पानी,

दातिये रज रज लावा विच धारियां,

चल भगता दर माँ दे चलिये,

आ गिया अशु दे महीने रुता प्यारियाँ,

हो चरण पादुका अर्धकवारी,

हाथी मथे दी आ गई वारि,

दातिये चढ़ी जावा मैं पोडियां प्यारियाँ ,

चल भगता दर माँ दे चलिये,

आ गिया अशु दे महीने रुता प्यारियाँ,

बागा दे विच कोयल बोले कोयल बोले मोर भी बोले.

दातिए फूल खिड़ियाँ ने फूल वाड़ियाँ,

चल भगता दर माँ दे चलिये,

आ गिया अशु दे महीने रुता प्यारियाँ,

बछड़ा तेरी भेट चढ़ावे चंचल माँ तेरे गुण गावे,

दातिये मिल गइयन संगता प्यारिया,

चल भगता दर माँ दे चलिये,

आ गिया अशु दे महीने रुता प्यारियाँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।