बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

सौरभ मधुकर
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ ! मैं तुझ से प्यार करुँगी

जीवन भर आभार करुँगी

आने दे मुझको भी जग में

माँ ! मैं भी हूँ अंश तुम्हारा

कहलाउंगी वंश तुम्हारा

आने दे मुझको भी जग में

माँ ! मत भूलो अपने वो दिन

कोख में थी तू भी तो इक दिन

आने दे मुझको भी जग में

बेटी ये कोख से बोल रही

माँ करदे मुझपे ये उपकार

मत मार मुझे,जीवन दे दे

मुझको भी देखन दे संसार

बिन मेरे माँ

तुम भईया को राखी किससे बँधवाओगी

मरती रही कोख की हर बेटी

तो बहू कहाँ से लाओगी

बेटी है बहन,बेटी दुल्हन

बेटी बिन सूना है परिवार

बेटी ये कोख से बोल रही

माँ करदे मुझपे ये उपकार

नहीं जानती मैं इस दुनिया को

मैंने तो जाना है बस तुझको

मुझे पता तुझे है फिकर मेरी

तू मार नहीं सकती मुझको

फिर क्यूँ इतनी मजबूर है यु

माँ क्यूँ है तू इतनी लाचार

मत मार मुझे,जीवन दे दे

मुझको भी देखन दे संसार

मैं बेटी हूँ,मैं बेटा नहीं

मैं तो कुदरत की रचना हूँ

तेरा मान बनूँगी,बोझ नहीं

तेरी ममता को मैं तरस रही

मत छीन तू मेरा ये अधिकार

बेटी ये कोख से बोल रही

माँ करदे मुझपे ये उपकार

गर मैं न हुई तो माँ

फिर तू किसे दिल की बात बताएगी

मतलब के इस दुनिया में माँ

तू घुट घुट के रह जायेगी

बेटी ही समझे माँ का दिल

'अंकुश' करले बेटी से प्यार

मत मार मुझे,जीवन दे दे

मुझको भी देखन दे संसार

बेटी ये कोख से बोल रही

माँ करदे मुझपे ये उपकार

मत मार मुझे,जीवन दे दे

मुझको भी देखन दे संसार

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।