मन को पावन करदो गंगा

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मन को पावन करदो गंगा,

जीवन कलश को धो धो गंगा,

हर हर गंगे मैया जय जय गंगे मैया,

कर ती हु श्रदा से तेरी पूजा,

भागी रथ की देख तपस्या देव लोक से धरती पे आई,

भरम कमंडल विष्णु चरण तज गंगा शिव की जता में समाई,

बहती अमृत जल की धारा नव जीवन देकर तुम ने तारा,

हर हर गंगे मैया जय जय गंगे मैया,

गो मुख तू चल कर आती तट को तीर्थ बनाती है,

यमुना सरस्वती से मिल कर प्रयाग की महिमा बढ़ाती है,

अमृत घाट का अमिरत दे कर जग पावन कर देती है,

हर हर गंगे मैया जय जय गंगे मैया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।