गौरा जी को भोले का योगी रूप सुहाया है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गौरा जी को भोले का योगी रूप सुहाया है,

इसी लिए तप करके भोले नाथ को पाया है,

कैलाश पर्वत पे शिव जी का बसेरा है,

शिव जी के चरणों में गोरा माँ का डेरा है,

शिव शक्ति बन कर के इनकी लीला को रचाया है,

गौरा जी को भोले का योगी रूप सुहाया है

मेरे भोले शिव जैसा देव न कोई दूजा,

पारवती माँ इनकी दिन रात करे पूजा,

हर युग में शिव जी का देखो साथ निभाया है,

गौरा जी को भोले का योगी रूप सुहाया है

देवो के देव है ये माहाकाल महादेवा,

गणेश और कार्तिक जी इनकी करे सेवा,

नंदी बिनगी शिव गन ने जय कारा लगाया है,

गौरा जी को भोले का योगी रूप सुहाया है

इक लोटा जल जो भी शिव लिंग पे चढ़ाता है,

मन की मुरादे सारी शिव मंदिर से पाता है,

अपने सब भक्तो को भव पार लगाया है,

गौरा जी को भोले का योगी रूप सुहाया है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।