सइयां जेहड़े पासे वेखा मैनु तू दिसदा

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॥ पावन पाठ ॥

सइयां जेहड़े पासे वेखा मैनु तू दिसदा,

पत्ते पत्ते विच सइयां तेरा मुँह दिसदा,

साहिबा जेहड़े पासे वेखा मैनु तू दिसदा,

चाँद सूरज सितरेया च आउंदा है नजर,

तू ते सच मुच् सरिया च आउंदा है नजर,

गल करा की एह मेरे लुह लुह दिसदा,

सतगुरु जेहड़े पासे वेखा मैनु तू दिसदा,

कण कण विच सइयां तेरा मुँह दिसदा

ह्वावा विच तू धूपा छावा विच तू,

जेहड़े तीर था नु जान ओह न राहवा विच तू,

चढ़ी चरखे ते मॉल नहीं रूह दिसदा,

सइयां जेहड़े पासे वेखा मैनु तू दिसदा,

कण कण विच सइयां तेरा मुँह दिसदा

एह जो खंड ब्रह्माण्ड तेरी होन्ड तो न वख,

राणे वेखने नु चाहदी मेरे गुरा वाली आँख,

जसा लोहियां वाला आखे हर रूह दिसदा,

सइयां जेहड़े पासे वेखा मैनु तू दिसदा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।