महापे जमवाय माँ की किरपा होई

सौरभ मधुकर
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॥ पावन पाठ ॥

महापे जमवाय माँ की किरपा होई

फूले- फले परिवार

महापे जमवाय माँ की

मइया की किरपा से म्हारो भर्यो रवै भण्डार

महापे जमवाय माँ की

जब कोई विपदा सर पे आवे मनड़ो न घबरावै जी

सौंप दे मइया के हाथो नैया की पतवार

महापे जमवाय माँ की

महापे जमवाय माँ की किरपा होई

फूले- फले परिवार

अपनी चुनड़ी की छैया में हरदम राखे म्हाने जी

म्हारो तो म्हारी मइया पे पुरो दारमदार

महापे जमवाय माँ की

महापे जमवाय माँ की किरपा होई

फूले- फले परिवार

सबके बस की बात नही है,कुण इतनी परवाह करे

म्हारे घर को ध्यान माँ राखे,बन के पहरेदार

महापे जमवाय माँ की

महापे जमवाय माँ की किरपा होई

फूले- फले परिवार

कहे पवन के करे भरोसो जो अपनी कुलदेवी पे

सोने-चांदी धन दौलत की खूब रहे भरमार

महापे जमवाय माँ की

महापे जमवाय माँ की किरपा होई

फूले- फले परिवार

महापे जमवाय माँ की किरपा होई

फूले- फले परिवार

महापे जमवाय माँ की

मइया की किरपा से म्हारो भर्यो रवै भण्डार

महापे जमवाय माँ की

संपर्क - +919831258090

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।