साई नाम की जुगनी

पारंपरिक
माँ गंगा भजन साईं भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

मैं जुगनी मैं जुगनी मैं जुगनी,

जुगनी जुगनी जुगनी रे,

साईं नाम की जुगनी,

मेरे बाबा की जुगनी,

मैं तो साईं की जुगनी,

साईं नाम की जुगनी,

मुझे पागल पागल मत बोलो मैं साईं की हु दीवानी,

तुम भी पागल हो जाओ अगर देखलो जलवा नुरानी,

आल्हा वाणी की जुगनी.....

सोना लेने साईं गये सुना कर गये बेश,

सोना मिला न साईं मिले मेरे रूपा हो गए केश.

मैं तो साईं की जुगनी साईं नाम की जुगनी....

गंगा घाट पर मैं हु खड़ी पानी झील मिल होए,

मैं पापन साईं उजले सो मिलना किस बिध होये,

मैं तो साईं की जुगनी साईं नाम की जुगनी,

मोसे रूठे अपने पराये कोई न मेरा साथ निभाये,

सब रूठे इक तुम न रुठियो तुम रुठियो तो गजब हो जाए,

मैं तो साईं की जुगनी साईं नाम की जुगनी,

जा रे सखी तू जा ले जा संदेसा जा साईं के द्वार,

कोई न दर से खाली लौटा तेरा भरा भंडार,

मैं तो साईं की जुगनी ...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।